I wrote this poem after the tragic crash of mirage 2000 in Bangalore on 1 February 2018 in which we lost two brave hearted Pilots Squadron Leader Sameer Abrol and Squadron Leader Siddhartha Negi. My condolences to their families for their such tremendous loss . And things making worse is how people even don't know and even don't care unless or until something threatens their lifestyle .
This poem is written from the perspective of a father after losing his son, a soldier.
वर्दी
आज मैंने अपना बेटा खोया है,
एक मां का दिल फिर रोया है,
मैंने कहा था कि ये वर्दी मत पहन,
रह जाएगी अकेली तेरी मां और बहन,
मगर तू मेरी कब सुनता है,
जो मैंने चाहा उससे अलग ही चुनता है।
मैंने कहा था देशभक्ति से किसका भला हुआ है,
जिस देश की रक्षा करने जा रहा है,
उस देश से पूछ क्या उसने तेरा नाम भी सुना है?
खबरों में तेरी चर्चा भी ना हुई,
क्यूंकि लोगो को पता है कि आज तू कल औेर कोई।
बस एक फर्क है तू मरेगा नहीं तू शहीद कहलाएगा,
मगर क्या ये शब्द तेरी मां को समझा पाएगा।
तू इस देश का नहीं बेटा तू मेरा था,
तू इस घर की शाम और सवेरा था।
काश तू दफ्तर वाली नौकरी करता,
कम से कम तेरे मां बाप का सहारा को रहता
मगर तू चला गया,
हाथ में बस एक तिरंगा और मुठ्ठी भर मेडल छोड़ गया,
और यहां पूरा देश " how's the Josh " कहता रह गया।
यहां किसी को तेरा नाम भी पता ना चल पाया,
कि था एक वीर जो इस देश की रक्षा में शहीद हो गया ।
गुस्सा मुझे इस देश से नहीं तुझ से है,
जब ये सुभाष चन्द्र बोस और भगत सिंह को भूल गए, तो तू कौन है,
तू एक और बच्चे के अंदर देश भक्ति जगा गया,
उसके मां बाप भी वही देखेंगे जो तू हमें दिखा गया।
जब इस देश को तेरी परवाह नहीं तो तुझे क्यों,
ये देश एहसान फरामोश है और रहेगा,
मगर तेरी मां के आंसुओ का मौल कौन चुकाएगा,
गलती तेरी थी तुझे वर्दी नहीं पैंट सूट पहनना था।
क्यूंकि बाबू और नेता इस देश को समोसे की तरह तुम्हारे खून में डुबोकर खाते रहेंगे,
जंग लगी शमशीरों को हाथ में पकड़ाकर सरहद पर भेजते रहेंगे,
और ये जनता तुम्हारी देशभक्ति और त्याग पर ऐसे ही पलती रहेगी,
तुझे वर्दी नहीं पहननी थी।
- संयम मलिक
Heart touching poem
ReplyDeleteNice @malik sanyam
Really amazing.. I really appreciate your poem & Ur skill
ReplyDeleteI can feel the pain. Great effort.
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