Saturday, 29 May 2021

मैं

 दोस्तों से घिरा हूं फिर भी अकेला हूं मैं,
हंसता बहुत हूं लेकिन बहुत सहमा हूं मैं, 
लोग पूछेंगे तो मुस्कराकर कह दूंगा की ठीक हूं मैं,
अपनी मां को कैसे बहुत टूटा हूं में,
अपने पापा को केसे दिखाऊं की कितना कमजोर हूं मैं,
अपनी सुखी आखों को कैसे समझाऊं की रोना चाहता हूं मैं,
मैं दुनिया को कैसे बताऊं की सब कुछ होते हुए भी कितना गरीब हूं मैं।